Tuesday, July 12, 2022

न लोरी सुनाएँ

 






न लोरी सुनाएँ

न गीत गुनगुनाएँ

कहिले हप्काएँ

कहिले दप्काएँ


न आल्हादमा चुमेँ

न तिमीसँगै झुमेँ

कहिले झर्किएँ

कहिले गर्जिएँ


न सुम्सुम्याएँ

न थुमथुम्याएँ

कहिले झकझक्याएँ

कहिले ढक्ढक्याएँ


न हाँस्न सिकाएँ

न समय बिताएँ

कहिले झिँजाएँ

कहिले तिलमिलाएँ




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