Thursday, August 11, 2022

पिडा भुली हाँस्न

पिडा भुली हाँस्न रहर भो जीन्दगी

जीउनै नसकिने, कहर भो जीन्दगी


तिमीले दिएका चोटहरुको प्याला

पिउनै नसकिने, जहर भो जीन्दगी


चारै तिर छट्पटी अनि कोलाहल

दुर्गन्धित, सहर भो जीन्दगी


न हर्ष न खुसी उजाड उजाड

पानी बिनाको, नहर भो जीन्दगी


असरल्ल अस्तव्यस्त अनि निरस

बर्षा पछिको, बगर भो जीन्दगी


दुःख पिडा जति नै आइलागे पनि

रमाउँदै बाँच्ने, ठहर भो जीन्दगी


प्रभा अधिकारी

सूर्यविनायक-५

भक्तपुर

२०७६/०४/१२




No comments:

Post a Comment

  गणतन्त्र दिवस राजतन्त्र  निरङ्कुशतन्त्र  प्रजातन्त्र  एकदलीय प्रजातन्त्र  बहुदलीय प्रजातन्त्र  शाहीतन्त्र  शिशु प्रजातन्त्र  लोकतन्त्र  अन...